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टी-20 वर्ल्ड कप के फाइनल मैच के बाद पंजाब में कश्मीरी इंजीनियरिंग के छात्रों के साथ की गई मार-पीट.

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13 नवंबर को पंजाब के मोगा में कश्मीरी इंजीनियरिंग के छात्रों के साथ पाकिस्तान बनाम इंग्लैंड के बीच हुए टी-20 वर्ल्ड कप के फाइनल मैच के परिणाम के बाद बिहार और अन्य राज्यों के छात्रों के एक समूह ने कथित तौर पर मार पीट किया ।

इस घटना में कई छात्र घायल भी हुए ,जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा है।
बाद में इस घटना की सूचना मोगा पुलिस को दी गई ,जिसके बाद पुलिस ने लाला लाजत राय इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के दस छात्रों को हिरासत में लिया है, जिसमें से पांच कश्मीर और पांच बिहार से हैं ।

मीडिया से बात करते हुए ,जम्मू-कश्मीर छात्र संघ के राष्ट्रीय सह-संयोजक दानिश लोन ने कहा है कि-“ हमें लाला लाजत राय इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी से एक बहुत ही तकलिफ़ भरा कॉल आया, जहां छात्रों ने हमें बताया कि टी-20 वर्ल्ड कप के मैच के बाद बिहार के कुछ छात्र कश्मीरी छात्रों के कमरे में घुस गए और उन्हें चिल्लाने और गाली देन देने लगे और बाद में उन्हें पीटना शुरू कर दिया ,जिसमें कम से कम 5-7 कश्मीरी छात्रों को गहरी चोटें आईं हैं , उनके कमरों में भी पथराव किया गया है ,और बाद में इन्हीं छात्रों को गिरफ्तार कर लिया गया।

इस मामले पर जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय संयोजक नासिर खुइमी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि- जब मुझे इस मामले की जानकारी मिली तो मैंने मोगा के एसएसपी गुलनीत सिंह से इस मामले पर जांच करने का आग्रह किया, और जो भी मोगा की इस भीषण घटना में शामिल हैं, उनके ख़िलाफ सख्त़ कार्रवाई करने की मांग की । फिर मुझे देर रात बताया कि सभी छात्र बिना किसी एफआईआर के छोड़ दिए जाएंगे, और आज उन्हें रिहा कर दिया गया है।

आगे नासिर ने बताया कि मैच से पहले या बाद में नारे लगाने या पंजाब के किसी स्थानीय लोगों के शामिल होने की अफवाहें बिल्कुल ग़लत है। यह झड़प केवल बिहार और कश्मीर के छात्रों के बीच हुई थी। और जिसमें कम से कम 5-7 कश्मीरी छात्रों को चोटें आईं हैंं और उन्हें इलाज के लिए स्थानीय अस्पताल में भरती करा दिया गया है।

आगे उन्होंने कहा कि – “हमने इस तरह की घटनाओं के बारे में पंजाब सरकार को कई बार लिखा है , और उनसे कश्मीरी छात्रों के लिए एक सुरक्षित माहौल बनाने का अनुरोध भी किया था ,क्योंकि पंजाब के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में कश्मीरी छात्रों की एक बड़ी तादाद वहां पढ़ रहे हैं।

लेकिन समय के हिसाब से हम मानते हैं कि राज्य सरकार ऐसे मुद्दों को हल करने में विफल रही है। और आज हमने फिर से अनुरोध किया है कि कश्मीर के किसी भी छात्र या इन घटनाओं से पीड़ित कश्मीर कम्यूनीटी के लोगों को गंभीरता से लिया जाए और इस पर गौर किया जाए।

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