मुस्लिम यूथ ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया (MYO) उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आज़मगढ़ के मुबारकपुर स्थित ऐतिहासिक जामिया अशरफिया मदरसे की मान्यता रद्द करने की कड़े शब्दों में निंदा करता है। यह कदम न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक अधिकारों और शिक्षा के मौलिक अधिकार पर सीधा हमला है।
MYO के जॉइन्ट कंविनर डॉ शुजाअत अली क़ादरी ने कहा है कि बिना किसी पारदर्शी, निष्पक्ष और न्यायोचित प्रक्रिया के किसी शैक्षिक संस्थान को “राष्ट्रविरोधी गतिविधियों” से जोड़ना गंभीर चिंता का विषय है। इस तरह के आरोप पूरे एक समुदाय को संदेह के घेरे में डालते हैं और समाज में अविश्वास व विभाजन को बढ़ावा देते हैं। मदरसे सदियों से केवल धार्मिक शिक्षा तक सीमित नहीं रहे, बल्कि नैतिकता, सहिष्णुता, भाईचारे और सामाजिक सद्भाव के केंद्र के रूप में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं।
सूफी परंपरा को निशाना बनाए जाने पर गंभीर चिंता
क़ादरी ने इस बात पर भी गहरी चिंता व्यक्त कि है कि सरकार की नीतियों और कार्रवाइयों में सूफी परंपरा से जुड़े मदरसों, दरगाहों और संस्थानों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। सूफी इस्लाम भारत की गंगा-जमुनी तहज़ीब, प्रेम, शांति और इंसानियत की पहचान रहा है। सूफी संतों ने हमेशा सद्भाव, सह-अस्तित्व और मानवता का संदेश दिया है, न कि कट्टरता या हिंसा का।
इसके बावजूद सूफी विचारधारा से जुड़े शिक्षण और धार्मिक संस्थानों पर छापे, मान्यता रद्द करने की कार्रवाइयाँ और प्रशासनिक उत्पीड़न यह संकेत देते हैं कि एक खास धार्मिक-सांस्कृतिक धारा को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। यह रुख न केवल सूफी परंपरा के विरुद्ध है, बल्कि भारत की बहुलतावादी, समावेशी और संवैधानिक संस्कृति के भी विरुद्ध है।
हमारी मांगें
मुस्लिम यूथ ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया (MYO) उत्तर प्रदेश सरकार से निम्नलिखित मांग करता है—
1.मदरसे की बंदी का निर्णय तत्काल वापस लिया जाए।
2.मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र न्यायिक जांच कराई जाए, न कि पूर्वाग्रहपूर्ण प्रशासनिक कार्रवाई।
3.सूफी संस्थानों और अल्पसंख्यक शिक्षण केंद्रों को निशाना बनाने की नीति पर तत्काल रोक लगाई जाए।
4.संविधान के अनुरूप सभी समुदायों के साथ समान, न्यायपूर्ण और सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित किया जाए।
क़ादरी ने कहा कि यदि इस प्रकार की कार्रवाइयाँ जारी रहीं, तो इससे देश के सामाजिक ताने-बाने और आपसी सौहार्द को गहरी क्षति पहुँचेगी। हम सभी लोकतंत्र-प्रेमी और संविधान-निष्ठ नागरिकों से अपील करते हैं कि वे इस अन्याय के विरुद्ध अपनी आवाज़ बुलंद करें और शिक्षा, सूफी परंपरा तथा भारत की साझा विरासत की रक्षा के लिए आगे आएँ।















