India

एमपी: अब्दुल नईम के स्कूल निर्माण पर कार्रवाई, वैध दस्तावेज़ों के बावजूद तोड़फोड़ का आरोप, मुख्यमंत्री को पत्र।

Spread the love

मध्य प्रदेश के बैतूल ज़िले की भैंसदेही तहसील स्थित धाबा गाँव में निजी खर्च से बन रहे एक स्कूल भवन के हिस्से को प्रशासन द्वारा गिराए जाने का मामला सामने आया है। इस कार्रवाई को लेकर पाँचवीं अनुसूची और PESA क़ानून के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री को औपचारिक शिकायत सौंपी गई है।

शिकायत के अनुसार, 13 जनवरी 2026 को धाबा गाँव में स्थानीय निवासी श्री अब्दुल नईम अपनी निजी ज़मीन पर लगभग 20 लाख रुपये की लागत से नर्सरी से कक्षा 8 तक के बच्चों के लिए एक निजी स्कूल भवन का निर्माण करवा रहे थे। यह निर्माण गाँव में शिक्षा की कमी को देखते हुए किया जा रहा था और इसे ग्रामवासियों व सरपंच की सहमति प्राप्त थी। पंचायत द्वारा निर्माण के लिए NOC भी जारी की जा चुकी थी।

आरोप है कि इसके बावजूद 13 जनवरी को, जब गाँव के कई लोग इस मामले में कलेक्टर कार्यालय गए हुए थे, उसी दौरान प्रशासन ने JCB मशीन से स्कूल भवन के एक हिस्से और सामने बने शेड को गिरा दिया। यह कार्रवाई “अवैध निर्माण” और “अवैध मदरसा” जैसी अफ़वाहों के आधार पर की गई बताई जा रही है, जबकि बाद की जांच में किसी भी प्रकार का मदरसा नहीं पाया गया और निर्माण स्कूल के उद्देश्य से ही किया जा रहा था।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि बैतूल ज़िला अनुसूचित क्षेत्र में आता है, जहाँ संविधान की पाँचवीं अनुसूची और PESA अधिनियम, 1996 लागू होता है। इन प्रावधानों के तहत किसी भी भूमि संबंधी निर्णय या निर्माण कार्य में ग्राम सभा की पूर्व सहमति अनिवार्य है। इस मामले में ग्राम सभा और पंचायत की सहमति होने के बावजूद बिना ग्राम सभा की राय सुने कार्रवाई की गई, जिसे कानून का उल्लंघन बताया गया है।

शिकायतकर्ता का कहना है कि पाँचवीं अनुसूची का मूल उद्देश्य आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास की रक्षा करना है। ऐसे क्षेत्र में, जहाँ सरकारी स्कूलों की भारी कमी है और कई स्कूल बिना भवन के चल रहे हैं, वहाँ निजी पहल से स्कूल का निर्माण आदिवासी बच्चों के हित में है। अफ़वाहों के आधार पर की गई बुलडोज़र कार्रवाई को संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के उल्लंघन के रूप में भी देखा जा रहा है।

मुख्यमंत्री से मांग की गई है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, गिराए गए हिस्से के पुनर्निर्माण की अनुमति दी जाए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख़्त कार्रवाई हो। साथ ही, अनुसूचित क्षेत्रों में शिक्षा से जुड़े किसी भी निर्णय में ग्राम सभा की अनिवार्य सहमति सुनिश्चित करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने का अनुरोध किया गया है।

शिकायत में उम्मीद जताई गई है कि सरकार इस मामले में संवेदनशीलता दिखाते हुए संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप त्वरित कार्रवाई करेगी, ताकि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में बच्चों के शिक्षा के अधिकार पर कोई आंच न आए।

Related Posts

1 of 34

Leave A Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *